Balram Ko Gussaa KiuN Aataa Hai – I

Posted: July 24, 2014 in Dalvir Gill
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balu - Copy (2)

Balram Bodhi सहमत हूँ दलवीर| इतिहास के विकास पर मैं भी सवाल उठता हूँ ;
गुजरात की घटनायों पर लिखा मेरा नाटक असल में इसी समझ को चुनौती देता था की इतिहास के साथ विकास सीधे जुडा हुआ है!

नाटक के दोनों नायक गनी खान और नबी खान तीन सदीयों बाद यह देखने भारत आते हैं की औरंगजेब के बाद का भारत कहाँ पहुंचा है, तो वो बड़ी-बड़ी इमारतें, बसें गाडीयें देख कर चकरा जाते हैं|
लेकिन जैसे ही वो दंगों में फंसते हैं तो उन्हें पता चलता है कि आदमी में तो कुछ भी नहीं बदला–सिर्फ ईंट-पत्थर और पहियों के जुड़ने के तरीके बदले हैं|
वो फैसला करते हैं की उन्हें वहाँ ही जाना होगा जहां कश्मीर के पंडित गए थे। आखिरकार गुरू ने उनसे वादा किया था कि उनका खालसा उनकी हिफ़ाज़्त करेगा
लेकिन यह क्या, वो तो देख्ते है कि पँथ के दावेदार तो समय के औरँगज़ेबों से मिले हुए हैं, उनसे मिल कर उन को मारने की फ़िराक में हैं, तो वो चोगा उतार कर अतीत में लौट जाते हैं, यह पुकारते हुए कि

हर तरफ़ औरँगज़ेब हैं, लेकिन खालसा कहाँ है?।

लेकिन इस कथा का सूत्रधार इतना सौभाग्यशाली नहीं है, वो भी राम-नवमी पर राम ढूँढने चला था लेकिन उसे हर तरफ़ रावण(शोर से भरे हुआ) ही रावण मिलते हैं< पर्न्तु वह किसी अतीत में छिप नहीं सकता, क्योंकि उसकी देह महज़ चोगा नहीं है, जिसे वो उतार दे और छिप जाऎ! लो मैनें पूरा पाठ सुना दिया।
जय हो!!!!

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Comments
  1. dalvirgill says:

    Balram Bodhi shared Dalvir Gill’s status.July 20

    mass grave . . .
    are these tears of grass?
    this dew!

    Hardeep Deepi, Umesh Ghai, Rani Singh Mystic’s Prism and 3 others like this.

    Dalvir Gill .
    a star twinkles
    in the corner of Modi’s eye . . .
    missile hits gaza
    July 20 at 5:31am · Like · 2

    Balram Bodhi
    Ohhhhhhhhhhhh nooooooooooooo; I mean……….YES………..
    July 20 at 5:32am · Like · 1

    Dalvir Gill
    we’re one ( sarcasm ),
    in the same way,”All animals are equal but some are more equal than others.” ( Sarcastic look at the sarcasm. )
    And when history repeats itself for the second or two hundredth time, it’s not always a farce, but the tragedy is doubled, tripled … multiplied, by the number of her repetition. we learn a lesson as an individual – seldom; as a group – never.
    i have lost all faith in History. nay, let me correct myself, in historians. we need to revalue all our previous theories of “What’s History”, for that matter we need to revalue all our values.
    July 20 at 5:42am · Like · 1

    Balram Bodhi
    सहमत हूँ दलवीर| इतिहास के विकास पर मैं भी सवाल उठता हूँ ; गुजरात की घटनायों पर लिखा मेरा नाटक असल में इसी समझ को चुनौती देता था की इतिहास के साथ विकास सीधे जुडा हुआ है! नाटक के दोनों नायक गनी खान और नबी खान तीन सदीयों बाद यह देखने भारत आते हैं की औरंगजेब के बाद का भारत कहाँ पहुंचा है, तो वो बड़ी-बड़ी इमारतें, बसें गाडीयें देख कर चकरा जाते हैं| लेकिन जैसे ही वो दंगों में फंसते हैं तो उन्हें पता चलता है कि आदमी में तो कुछ भी नहीं बदला–सिर्फ ईंट-पत्थर और पहियों के जुड़ने के तरीके बदले हैं| वो फैसला करते हैं की उन्हें वहाँ ही जाना होगा जहां कश्मीर के पंडित गए थे। आखिरकार गुरू ने उनसे वादा किया था कि उनका खालसा उनकी हिफ़ाज़्त करेगा लेकिन यह क्या, वो तो देख्ते है कि पँथ के दावेदार तो समय के औरँगज़ेबों से मिले हुए हैं, उनसे मिल कर उन को मारने की फ़िराक में हैं, तो वो चोगा उतार कर अतीत में लौट जाते हैं, यह पुकारते हुए कि हर तरफ़ औरँगज़ेब हैं, लेकिन खालसा कहाँ है?। लेकिन इस कथा का सूत्रधार इतना सौभाग्यशाली नहीं है, वो भी राम-नवमी पर राम ढूँढने चला था लेकिन उसे हर तरफ़ रावण(शोर से भरे हुआ) ही रावण मिलते हैं< पर्न्तु वह किसी अतीत में छिप नहीं सकता, क्योंकि उसकी देह महज़ चोगा नहीं है, जिसे वो उतार दे और छिप जाऎ! लो मैनें पूरा पाठ सुना दिया। जय हो!!!!
    July 20 at 6:31am · Unlike · 3

    Dalvir Gill
    gosh! Bha at least put your scripts on-line, ask Keshavoo to do it. now i so want to read this. i've read MaatLok so many times but couldn't arrange to stage it.
    We all bear the tragedy of your SutraDhar. what's this play titled.
    I've been thinking to do a video of Maatlok but that has a more universal theme and this one is more relevant for our times and needs an immediate attention. people are looking for any chance to turn this land in a blazing inferno. i didn't want to share this on fb, ( just like the very graphic images of Gaza ) but check this video and ( the number of it's shares.) read the comments. i did tried to talk and, in the beginning, engage people who were sharing into a dialogue but was out numbered. the one whose comment is on the top became a fb friend and i talked with on phone as well are kind of people who console you that there's still a hope and not everyone has turned into a complete nut.
    there use to be a difference in group psyche and mob psyche but now that demarcation line has blurred so completely that it's scary, totally terrifying. it's pretty clear that we are entering into a distinctive era but i can't make it out what kind of phase that would be. only thing i'm sure of that fear of future use to had an excitement, a thrill about it but now there's nothing but a fear with capital 'F' – an Absolute Fear.
    July 20 at 6:57am · Like · 1

    Dalvir Gill
    all previous interpretations have changed Balram, don't know if it a good thing or bad

    ਕਸਦ ਗਰ ਇਮਤਿਹਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ
    ਅਬ ਤਲਕ ਨੀਮ-ਜਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ

    ਸਿਜਦਾ ਕਰਨੇ ਮੇਂ ਸਰ ਕਟੇ ਹੈਂ ਜਹਾਂ
    ਸੋ ਤੇਰਾ ਆਸਤਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ

    ਗੁਫ਼ਤਗੂ ਰੇਖ਼ਤੇ ਮੇਂ ਹਮਸੇ ਨ ਕਰ
    ਯਹ ਹਮਾਰੀ ਜ਼ਬਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ

    ਛੋੜ ਜਾਤੇ ਹੈਂ ਦਿਲ ਕੋ ਤੇਰੇ ਪਾਸ
    ਯਹ ਹਮਾਰਾ ਨਿਸ਼ਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ

    'ਮੀਰ' ਅਮਦਨ ਭੀ ਕੋਈ ਮਰਤਾ ਹੈ
    ਜਾਨ ਹੈ ਤੋ ਜਹਾਨ ਹੈ ਪਯਾਰੇ
    July 20 at 8:06am · Like · 2

    Balram Bodhi
    दलवीर तुम जानते हो मैं कोई तुमसे छोटा नालायक नहीं हूँ…..हां हां हां…..मजा आ गया,….वैसे, उस नाटक की स्क्रिप्ट मेरे पास है नहीं, सैमुय्ल के पास थी, उसने संभाली नहीं, अब मेरा क्या दोष, पहले लिखूं फिर संभालूं ……अरे यह तो व्ही बात हुई की मरूं भी मैं और रोयूं भी मैं…………..हा हा हा हा………..फिर से मज़ा आया| अब नाराज़ मत होना यार, तुम्हारी नाराजगी नुझे अच्छी नहीं लगती, मैनें उस नाटक के बारे में तुमसे बात ही इस लिए की थी की मेरा मन कहता था कि कुछ निशाँ बच जाएँ| नाटक का नाम था, "तैं की दर्द ना आया"; उस नाटक में एक और सीन था, अष्टमी पर होने वाले कंजक पूजन का………..; गलीयों में निरीह देवियों से जबर-जिनाह करने के बाद हिंदुत्व के गाजी घर लौट कर चोटी बच्ची की कंजक रूप में पूजा करते हैं, उस बच्ची नें उन्हें खिड़की से गलीयों में धधियाते देखा है, अब वो उसकी पूजा कर रहे हैं, बच्ची सिमटती जा रही है, दुर्गा स्त्रोत पीछे से गूँज रहा है, धुन लास्य नहीं बल्कि ताण्डवी है, अब पूजा करके वो लोग चले जाते हैं, बच्ची बेहोश हो कर गिर जाती है, वो मुड़ कर नहीं देखते, अब पता नहीं यह पूजा थी या क्या था| दूसरी तरफ दंगों में मरे लोग फिर से उठते हैं तो उनके जिस्मों से हथियार उग रहे होते हैं|
    July 21 at 1:26am · Unlike · 1

    Dalvir Gill
    uh sure, i feel your pain … पहले लिखूं फिर संभालूं ……अरे यह तो व्ही बात हुई की मरूं भी मैं और रोयूं भी मैं. can you recreate it, cast can help.
    July 21 at 4:44am · Like

    Dalvir Gill
    oh and the particular video i talked about. after going through the comments and such, delete my this comment for i don't want anybody to go there. or maybe your wall is safe:

    July 21 at 4:50am · Like

    Dalvir Gill
    we can most certainly laugh at it अरे यह तो व्ही बात हुई की मरूं भी मैं और रोयूं भी मैं …. but bha, how many had to do that.
    July 21 at 4:55am · Like

    ਆਸਾ ਮਹਲਾ ੧ ॥
    आसा महला १ ॥
    Aasaa, First Mehl:

    ਖੁਰਾਸਾਨ ਖਸਮਾਨਾ ਕੀਆ ਹਿੰਦੁਸਤਾਨੁ ਡਰਾਇਆ ॥
    खुरासान खसमाना कीआ हिंदुसतानु डराइआ ॥
    Having attacked Khuraasaan, Baabar terrified Hindustan.

    ਆਪੈ ਦੋਸੁ ਨ ਦੇਈ ਕਰਤਾ ਜਮੁ ਕਰਿ ਮੁਗਲੁ ਚੜਾਇਆ ॥
    आपै दोसु न देई करता जमु करि मुगलु चड़ाइआ ॥
    The Creator Himself does not take the blame, but has sent the Mogal as the messenger of death.

    ਏਤੀ ਮਾਰ ਪਈ ਕਰਲਾਣੇ ਤੈਂ ਕੀ ਦਰਦੁ ਨ ਆਇਆ ॥੧॥
    एती मार पई करलाणे तैं की दरदु न आइआ ॥१॥
    There was so much slaughter that the people screamed. Didn't You feel compassion, Lord? ||1||

    ਕਰਤਾ ਤੂੰ ਸਭਨਾ ਕਾ ਸੋਈ ॥
    करता तूं सभना का सोई ॥
    O Creator Lord, You are the Master of all.

    ਜੇ ਸਕਤਾ ਸਕਤੇ ਕਉ ਮਾਰੇ ਤਾ ਮਨਿ ਰੋਸੁ ਨ ਹੋਈ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
    जे सकता सकते कउ मारे ता मनि रोसु न होई ॥१॥ रहाउ ॥
    If some powerful man strikes out against another man, then no one feels any grief in their mind. ||1||Pause||

    ਸਕਤਾ ਸੀਹੁ ਮਾਰੇ ਪੈ ਵਗੈ ਖਸਮੈ ਸਾ ਪੁਰਸਾਈ ॥
    सकता सीहु मारे पै वगै खसमै सा पुरसाई ॥
    But if a powerful tiger attacks a flock of sheep and kills them, then its master must answer for it.

    ਰਤਨ ਵਿਗਾੜਿ ਵਿਗੋਏ ਕੁਤੀ ਮੁਇਆ ਸਾਰ ਨ ਕਾਈ ॥
    रतन विगाड़ि विगोए कुतीं मुइआ सार न काई ॥
    This priceless country has been laid waste and defiled by dogs, and no one pays any attention to the dead.

    ਆਪੇ ਜੋੜਿ ਵਿਛੋੜੇ ਆਪੇ ਵੇਖੁ ਤੇਰੀ ਵਡਿਆਈ ॥੨॥
    आपे जोड़ि विछोड़े आपे वेखु तेरी वडिआई ॥२॥
    You Yourself unite, and You Yourself separate; I gaze upon Your Glorious Greatness. ||2||

    ਜੇ ਕੋ ਨਾਉ ਧਰਾਏ ਵਡਾ ਸਾਦ ਕਰੇ ਮਨਿ ਭਾਣੇ ॥
    जे को नाउ धराए वडा साद करे मनि भाणे ॥
    One may give himself a great name, and revel in the pleasures of the mind,

    ਖਸਮੈ ਨਦਰੀ ਕੀੜਾ ਆਵੈ ਜੇਤੇ ਚੁਗੈ ਦਾਣੇ ॥
    खसमै नदरी कीड़ा आवै जेते चुगै दाणे ॥
    but in the Eyes of the Lord and Master, he is just a worm, for all the corn that he eats.

    ਮਰਿ ਮਰਿ ਜੀਵੈ ਤਾ ਕਿਛੁ ਪਾਏ ਨਾਨਕ ਨਾਮੁ ਵਖਾਣੇ ॥੩॥੫॥੩੯॥
    मरि मरि जीवै ता किछु पाए नानक नामु वखाणे ॥३॥५॥३९॥
    Only one who dies to his ego while yet alive, obtains the blessings, O Nanak, by chanting the Lord's Name. ||3||5||39||
    July 21 at 4:57am · Like

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